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''किस किस की सुरक्षा ''

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 25-04-2013 16:41:00

'''किस किस की सुरक्षा ''मुकेश अम्बानी जैसे उद्योगपति ,खतरे से नहीं है खाली सरकार हमारी दे रही गाली । उनकी सुरक्षा के  लिए सी .आर .पी .ऍफ़ बल शाली ॥ सरकार को चिंता है तो पैसे वालो की ,भाड़ मे  जाए दुनियादरी ,लूट रही है जिसकी आबरू ,वो है इस जंहाँ की सारी नारी नारी की सुरक्षा करना ,उन पर हुए जुल्म का ,उनको इन्साफ दिलाना ,दायित्व हमारी सरकार का । ऐसा क्या बात है अम्बानी मे ,जो उन्हें सुरक्षा देने  की तैयार , सुरक्षा देना(...)'

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कविता : प्राणी जा रहा

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 22-04-2013 16:12:00

' प्राणी जा रहा प्राणी बड़ा ही बंधा हुआ ,साबित होता जा रहा है ..... हर एक प्राणी ,प्राणी के पीछे से जा रहा है .....जो वो कर रहा है,वही करने की वो सोच रहा है ......न उसकी अपनी समझ है ,न ही अपनी सोच है ......जो देख रहा है प्रक्रति और संसार से ,वो वही कर रहा है ......हर एक प्राणी ,प्राणी के पीछे जा रहा है ......अब वह समय दूर  नहीं ,जिसमें प्राणी को प्राणी बाधेगा .....आँगन की उस चौपाल में,जहां प्राणी ही प्राणी आयेगा .....प्राणी को देख के ,प्राणी के मुख में मुस्कान होगी(...)'

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कविता - मुकाम पा लिया

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 19-04-2013 16:45:00

' मुकाम पा लिया भोर का समय था ,मैं  जा रहा था राहों से .....सून- सान थी सारी जगह ,मैं डर रहा था तम के गर्दिश में .....सहसा चली पवन तीव्रता से ,भागे काले मेघ डरकर ....खिल उठा रवि हंसकर ,मन से निकला मेरे डर .....पवन थी इतनी ठंडी ,ताजगी भर गयी मेरे जीहान में ....आगे बढ़ा तो एक तितली आयी ,आ बैठी मेरे हाथ में ......कितने वर्णों की थी ,की मैं  कुछ कह नहीं सकता ..... देख - देख मैं खूब हंसता ,उसकी सुन्दरता के बारे में सबसे कहता .....जिस कार्य से निकला थ(...)'

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कविता - क्यों नहीं याद

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 18-04-2013 18:39:00

' क्यों नहीं याद वो भगत का शहीद खून ,वो जवानी झांसी की रानी की  ........ जो झकझोर दिया था ,उन गोरे अंग्रेजों को ......लेकिन आज के इस भ्रस्ट समाज में, भ्रस्टाचारियों की है भरमार ......इन  भ्रस्टाचारियों से ही ,चल रही है हमारी ......मिली जुली सरकार ,आज के इस  भ्रस्ट समाज में ......रह - रहे हैं सभी एक साथ ,अपने हक़ को मांगने के लिए .....आगे बढ़ नहीं रहे कभी ,क्यों हम किसी का जुल्म सहें ?क्यों न हम अपना हक़ लेकर रहें?        &(...)'

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कविता - मेरा गाँव

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 17-04-2013 18:00:00

'              कविता  मेरे गाँव की सुनों कहानी ......लाइट के प्रति हो रही मनमानी, कभी रात में लाईट आती है ....तो कभी हमेशा के लिए जाती है, विधुत व्यवस्था  है बड़ी ख़राब .....इस पर चलता है केस्को का राज, विधुत से गाव के लोग परेशान ......इसीलिये नहीं है गाँव की शान ,                         (...)'

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Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 16-03-2013 16:39:00

'               कविता इंसान के लिए हमदर्दी नहीं पत्थर दिल इंसान में , से मरते हैं लोग इस जहांन में .......दुनिया को देखिये चाँद तक पहुंच गयी ,ईश्वर पर अब भी विश्वास करते हन्दुस्तान में .....पड़ोसी चाहे भूंख से तडपता रहे लेकिन ,फल,दूध आदि पहुचाते हैं ईश्वर के मकान में .....ईश्वर तो लोगों के दिलों में बसे हैं, क्यों ढूढ़ते हो पत्थर की मूर्ति और आसमान में ?भुखमरी हटाने का वादा तो करते हैं ये नेता ,लेकिन ताकत नहीं उ(...)'

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Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 14-03-2013 02:37:00

'    कविता रोड और क्रासिग पर ,गाडी और मोटर कारों की.......लगी रहती है कतार ,ट्रैफिक पुलिस की बात निराली .......करते हैं अपनी मनमानी ,लगे रहते हैं लोडर ट्रकों से .......रुपयों की वशूली करने ,ट्रैफिक नियमों का ......पालन नहीं कराते ,लोडर ट्रक वालों को है गरियाते.......             लेखक : जीतेन्द्र कुमार              कक्षा : ९     &nb(...)'

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Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 13-03-2013 05:48:00

'       कविता मंहगाई ने आसमान छू डाला , गरीबों को तो भूखा मार डाला .....सब्जी मंहगी अनाज मंहगा,जहां पर भी देखो सब कुछ मंहगा .....पेट्रोल तो इतना मंहगा हो गया, गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना .....कितना ज्यादा मंहगा पड गया ,नया नेता बनाने से ......कुछ बदलाव नहीं आया ,सभी चीजों को मंहगाई ने है खाया ......नाम : चन्दन कुमारकक्षा : ७अपना घर '

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शीर्षक : ठंडी

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 16-02-2013 16:13:00

'              "ठंडी" इस बार ठण्ड का आया मौसम ।जिससे की सारा शहर गया सहम ।।तूने न पहचान ये तेरा है भ्रम ।सर्दी में बोले हर -हर गंगे हम ।।सूरज न दिखता , ये तेरा है भ्रम ।सर्दी में कोहरे का कोहराम ।।सुन लो बच्चो सुन लो तुम ।छुट्टी में कर लो आराम ।इतना भी न करना आराम ।।कि कोई न दे तुमको काम ।कुछ काम करो और जाओ लायक ।जिससे न कहा पाए कोई मक्कार , निक्कमा ,नालायक नाम : आशीष कुमार कक्षा 10अपना घर कानपुर&nbs(...)'

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शीर्षक : स्त्री

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 16-02-2013 02:05:00

'            " स्त्री "एक स्त्री जिसने समाज को बनाया ,आज उस स्त्री को महत्व ,लोगों की समझ से परे है ,क्योंकि लोगों नहीं समझ रहें सामाजिक तत्व ,की स्त्री वाही नारी है ,जिसकी गोद मे खेली दुनिया सारी ,आखिर कब तक सहे वह जुल्म ,मानव कर रहा दिन प्रति -दिन जुर्म ,तुम्हे है इतनी बेशर्मी ,फिर भी बैक स्त्री को ही कहते मम्मी ,तुम्हारे घर में भी है माँ - बहन ;यदि उनका करे कोई बलात्कार और लुटे गहने ,फिर बोल क्या करोगे ?क्या  इसी तरह के स्त्री पर ह(...)'

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Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 11-02-2013 16:02:00

' शीर्षक :- आज की फिल्मे आज की फिल्मे तो आदर्श बनी पड़ी है.... युवा पीढी को भड़काने में | ऐसे अश्लील से शब्द है.... हर किसी न किसी फ़िल्मी गानों में |वर्तमान में फिल्मो का ऐसा पड़ा है, सब पर असर.... कि चारो ओर चल रहा है, फिल्मो का ही कहर | मुन्नी से लेकर शीला की जवानी....हर बच्चे की जुवां पर है, अजब प्रेम की गजब कहानी | डायेरेक्टर भी तो कहते है, क़ि लोंगो की जैसी मांग.... वैसी हम करेंगे उनकी पूर्ति | दुकानदार का कम है, बीडी तम्बाकू को बेचना.... तो तुम अपने आप को रोको मत खाओ(...)'

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शीर्षक : दामिनी की आवाज

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 26-01-2013 16:11:00

'  '' दामिनी  की  आवाज ''मरी नहीं मैं जिन्द्दा हूँ ।सफेद रंग का परिन्द्दा हूँ ।।नाम  नहीं कोई मेरा ।न नाम मेरा तुम जानो ।।मेरी धड़कन को सुन लो ।मेरी आवाज को पहचानो ।। इंसाफ चाहिए मुझको ।जो तुम ही दिल सकते हो ।।मैं सो गई तो क्या हुआ ।तुम तो देश को जगा  सकते हो ।।दामिनी नाम रखकर ,इस देश मे बनी मेरी पहचान ।मई नहीं चाहती की के साथ हो ।।जैसा मेरा हुआ अंजाम । मरी नहीं मैं जिन्द्दा हूँ । सफेद रंग का परिन्द्दा हूँ ।।नाम : रितिक चंदेल उन्नाव&nb(...)'

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शीर्षक : बच्ची

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 25-01-2013 10:27:00

'         ''बच्ची ''वह ममता  की कोमल ,   कमल की चमेली , +माता ,पिता की ,वह अकेली ।वन सुन्दर एक राजकुमारी थी ।।वह सरजमी की  ममता ,वह अनंत की  झोली ।वह हिम जैसी सफेदी ,वह सरिता झरना की उद्गम झोली ।वह सुन्दर एक राजकुमारी थी ।।वह बड़े जोर से हँसती थी ।वह सारे सरगम गा चुकी थी , वह दिनकर का उद्गम खोल चुकी थी । वह ममता  की कोमल ,कमल की चमेली ,माता ,पिता की ,वह अकेली । वह सुन्दर एक राजकुमारी थी ।।&n(...)'

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शीर्षक : चिड़िया का बचपन

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 18-01-2013 15:36:00

'    '' चिड़िया का बचपन ''बचपन में मेरे आँगन में ।एक चिड़िया आती थी ।आँगन में बिखरे दानों को ।।चुन - चुन कर खाती थी ।बस ची -ची शोर मचाती थी ।।बच्चा  बोल  मम्मी से ।अम्मा आटे की बना के गोली ।।दाना रोज चुगाती थी ।यह भी चिड़िया भूखी है ।।यह चोच फैलाकर आती है ।मजबूरी है चिड़िया की ।।वह दाना चुराकर लाती है ।बछो के खातिर चिड़िया रानी ।दाना लेकर आती है ।डाला दाना चूजे के मुँह मे , वह मन ही मन मुस्काती है ।।नाम : जीतेन्द्र कुमार कक्षा : 9अपना(...)'

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शीर्षक : मेहनत

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 17-01-2013 15:30:00

'       मेहनतजो मेहनत करते रहते है ।उन्किहार नहीं होती है ।।जिनकी मुट्ठी में है मेहनत ।सच्ची जीत उन्हें मिलती है ।।मेहनत से जो घबराता है ।बे सब से है पीछे रहत।।जो मेहनत करता है वह आगे रहता है ।नाम :अलीजा फात्मा आजमगढ़ , उत्तर प्रदेश  '

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शीर्षक : रविवार

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 13-01-2013 16:10:00

'            रविवार मेरे दिमाग में है ख़ास - बात ।जो भटक रही है रातो -रात ।।लोग रविवार को छुट्टी क्यों मनाते हैं ।रविवार को ही बाजार क्यों जाते है ।।स्कूल हो या बैंक , कल कारखाना ।रविवार को ही छुट्टी मनान।।लोग शनिवार को हही छुट्टी क्यों नहीं मनाते है ।लोग रविवार को स्कूल क्यों नहीं खुलवाते है ।।आखिर इतहास क्या ? रविवार का ।इतना महत्व क्यों है , रविवार का ।।दोस्त कहे रविवार को आना ।मेरे घर में खाना खाना ।।आखिर रविवार है क्या ? इसका इतिह(...)'

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शीर्षक : नव वर्ष के पावन अवसर पर युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक कविता

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 12-01-2013 15:55:00

'" नव वर्ष के पावन अवसर पर युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक कविता "एक था आर .टी .ओ . का दलाल ।शराबी भी था और शौक़ीन भी ।।दलाली का पैसा कमाना जिसका था शगल ।जिसे न परिवार की चिंता थी न समाज की ।।बस रहता था नशे में मस्त ।पर एक दिन की घटना ने जिसकी बदल दी अक्ल ।।फिर आर .टी .ओ . की दलाली से निकला एक आर .टी .ओ . कार्य करता ।।नशे की लत छूटी और शौकीनों ने समाज सेवा का रूप ले लिया ।।जूनून ऐसा की हाथ आर .टी . आई . आवेदन लिखते - लिखते थकते नहीं और मुंह से आर .टी . आई . के लिए आवाज बंद(...)'

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शीर्षक : माँ

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 10-01-2013 16:13:00

'          " माँ "  तू ममता की झोली है । तेरी महिमा जग में न्यारी है।। तू साथ समुद्र से भी गहरी है । फिर भी तेरी लहरें  नहीं ।। तू ममता की झोली है । तेरी महिमा जग में न्यारी है।। तेरे बिना घर गृहस्थी  अधूरी है । तू घर की देवी है ।।तू  है पीयूष चमन की हरदम ।  तेरे बिन शोक पवन की  चलती ।। तू ममता की झोली है ।  तेरी महिमा जग से न्यारी ।। नाम : अशोक कुमार(...)'

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शीर्षक : मेरा भारत महान

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 09-01-2013 16:20:00

'    मेरा भारत महान सभी देशो से  है महान ।ये है हमारा प्यार हिन्दुस्तान ।।लोग यहाँ पर इसका ,करते खूब गुणगान ।इसकी महानता का जब पता लगाया ।।मैं तब कुछ जान पाया ।घूसखोरी और घोटाला ।यही है इसकी सबसे बड़ी शान ।।बहू ,बेटिओं की न इज्जत होती ।करते है लोग खूब धूम्रपान ।।इन सब के बावजूद भी ।भारत मेरा सबसे महान ।।naam : dharmendra kumarclass : 9apna ghar , kanpur'

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शीर्षक : महिला की महिमा

Author : BAL SAJAG      Blog : बाल सजग      Date : 08-01-2013 16:05:00

'     महिला की महिमा तुझे देखते ही ।तेरे पिता ने शीश झुकाया ।।तेरी माँ को गाली देकर ।स्त्री तू भी कितनी निराली ।फिर भी न होती तेरी निगरानी ।।जब तू एक बच्ची थी ।अपने माँ के गर्भ से जन्मी थी ।।घर को दौड़ा आया ।।पूछने पर ,मुरझाया सा जवाब पाया ।माँ को गाली देकर ,बेटा क्यों नहीं जन्माया ?बेटे की महिमा ,बड़ी ही निराली ,हर महिला इसके चक्कर में ,होती शोषण का शिकार ,महिला की यह महिमा है ,जिससे पुरुष और महिला है ।महिला की महिमा को पहचानो ।।फिर शोषण करने की ठानो , स्(...)'

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