Skip Navigation Links


कान फिल्‍म फेस्अिवल में भारत की मौजूदगी

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 22-05-2013 13:40:00

''

पूरा लेख पढ़ा

दर्शक बढ़े हैं मेरे-अजय देवगन

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 20-05-2013 07:04:00

'-अजय ब्रह्मात्मज    दो फिल्मों के अंतराल के बाद अजय देवगन और प्रकाश झा फिर से एक साथ आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में दोनों की जोड़ी ने अनेक सारगर्भित और मनोरंजक फिल्में दी हैं। ‘आरक्षण’ के समय यह खबर आई थी कि दोनों के बीच कोई अनबन हो गई है, लेकिन ‘सत्याग्रह’ की शूटिंग के साथ यह खबर बेबुनियाद साबित हुई। दोनों ने हाल ही में भोपाल में ‘सत्याग्रह’ की शूटिंग पूरी की। अजय देवगन ने अजय ब्रह्मात्मज से इस अंतरंग बातचीत में अनेक पहलुओं को उजागर किया। - ‘दिल क्या करे’ से ‘सत्याग्(...)'

पूरा लेख पढ़ा

फिल्म समीक्षा : औरंगजेब

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 19-05-2013 10:34:00

'-अजय ब्रह्मात्मज अरसे बाद अनेक किरदारों के साथ रची गई नाटकीय कहानी पर कोई फिल्म आई है। फिल्म में मुख्य रूप से पुरुष किरदार हैं। स्त्रियां भी हैं, लेकिन करवाचौथ करने और मां बनने के लिए हैं। थोड़ी एक्टिव और जानकार महिलाएं निगेटिव शेड लिए हुए हैं। फिल्म में एक मां भी हैं, जो यश चोपड़ा की फिल्मों की मां [निरुपा राया और वहीदा रहमान] की याद दिलाती हैं। सपनों और अपनों के द्वंद्व और दुविधा पर अतुल सभरवाल ने दिल्ली के गुड़गांव के परिप्रेक्ष्य में क्राइम थ्रिलर पेश किया है। यशराज फिल(...)'

पूरा लेख पढ़ा

कान फिल्‍म फेस्टिवल में अमिताभ बच्‍चन का हिंदी संभाषण

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 16-05-2013 18:14:00

'कान फिल्‍म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में अमिताभ बच्‍चन का हिंदी संभाषण....'

पूरा लेख पढ़ा

दरअसल ...तकनीकी पक्षों की तारीफ

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 16-05-2013 17:45:00

'-अजय ब्रह्मात्मज    पिछले दिनों देश के एक मशहूर कैमरामैन से बातें हो रही थीं। पिछले बीस सालों से वे सक्रिय हैं। उन्होंने हिंदी में बनी कुछ लोकप्रिय और खूबसूरत फिल्मों की फोटोग्राफी की है। कहने लगे कि एक तो हम तकनीशियनों से कोई बातें नहीं करता। लोकप्रिय फिल्मों की तारीफ में भी हमारा उल्लेख नहीं होता। दर्शक ढंग से नहीं जानते कि किसी भी फिल्म में हमारा क्या योगदान होता है? मैंने बड़े से बड़े समीक्षकों की फिल्म समीक्षा में फिल्म के तकनीकी पक्षों को चंद वाक्यों में निबटाते(...)'

पूरा लेख पढ़ा

दरअसल ... भारतीय जन-जीवन में सिनेमा

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 14-05-2013 03:32:00

'-अजय ब्रह्मात्मज    भारतीय सिनेमा के सौ साल हो गए। सदी बीत गई। सिनेमा ने अगली सदी में प्रवेश कर लिया। भारतीय सिनेमा के इतिहास की इस चाल की धमक हर जगह सुनाई पड़ी। खास कर हिंदी सिनेमा को लेकर ज्यादा चहल-पहल रही। पहुंच और विस्तार में अन्य भारतीय भाषाओं से अधिक विकसित और व्यापक होने की वजह से यह स्वाभाविक है। कमोबेश सभी क्षेत्रों, समुदायों और देश के समस्त नागरिकों को सिनेमा ने प्रभावित किया है। अगर किसी ने अपनी जिंदगी में केवल एक फिल्म देखी है तो भी वह अप्रभावित नहीं रह स(...)'

पूरा लेख पढ़ा

औरत हूं तो सवाल पूछते हैं? -माधुरी दीक्षित

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 13-05-2013 18:30:00

'-अजय ब्रह्मात्‍मज शादी के बाद हिंदी फिल्मों की अभिनेत्रियां धीरे-धीरे अनेक प्रकार के दबावों की वजह से रुपहले पर्दे से गायब होने लगती हैं।निर्माता-निर्देशक और दर्शकों की रुचि उनमें कम होने लगती है। उन्हें हिंदी फिल्मों के अभिनेताओं की तरह लंबी उम्र नहीं मिलती। यही वजह है कि कुंवारी रहने पर उम्र बढऩे के साथ उन्हें तवज्जो नहीं दी जाती। अभिनेत्रियां इसे सहज तौर पर स्वीकार करती हैं। अभिनय क्षेत्र में सक्रिय रहने की लालसा रहन परे उन्हें सहयोगी,चरित्र और मां-बहन की भूमिकाएं ही मिल पात(...)'

पूरा लेख पढ़ा

फिल्म समीक्षा : गो गोवा गॉन

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 12-05-2013 15:49:00

'-अजय ब्रह्मात्मजहिंदी फिल्मों में इन दिनों अनोखे प्रयोग हो रहे हैं। अच्छी बात तो ये है कि उन्हें समर्थन भी मिल रहा है। निर्माता और दर्शकों के बीच इस नए रिश्ते को प्रयोगवादी निर्देशक मजबूत कर रहे हैं। युवा निर्देशकों की जोड़ी राज-डीके जैसे निर्देशक हैं। अपनी नई कोशिश में उन्होंने जोमकॉम पेश किया है। जोम्बी और कॉमेडी के मिश्रण से तैयार यह फिल्म भारत के लिए नई है। अभी तक हम भूत,प्रेत,चुड़ैल और डायन की फिल्मों से रोमांचित होते रहे हैं। लेकिन अब राज-डीके जोम्बी लेकर आए हैं। विदेशों म(...)'

पूरा लेख पढ़ा

मटरु की बिजली का मंडोला-विनीत कुमार

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 08-05-2013 19:02:00

'चवन्नी के पाठकों के लिए विनीत कुमार का यह लेख… विशाल भारद्वाज की फिल्म मटरु की बिजली का मंडोला जगह-जगह ऊब और बहुत ही औसत दृश्यांकन के बावजूद बड़े फलक की फिल्म है. लेकिन फिल्म का विस्तार जिस बड़े फलक तक है, ऐसे में ऊब पैदा करनेवाले फ्रेम्स को पीवीआर जैसे थिएटर में बैठकर देखते रहने के बावजूद कोई चाहे तो अर्थशास्त्र या संस्कृति समीक्षा की कक्षाओं में बैठकर व्याख्यायन सुनने के एहसास के साथ बहुत ही सादे ढंग से गुजर सकता है. वैसे भी जहां हर सांस्कृतिक चिन्हों,मानवीय संवेदना(...)'

पूरा लेख पढ़ा

इम्तियाज अली की सिनेमाई चेतना - राहुल सिंह

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 07-05-2013 19:45:00

'चवन्‍नी के पाठकों के  लिए मोहन्ल्‍ला लाइव से साधिकार                                                    सोचा न था कि फकत चार फिल्मों में लगभग एक-सी ‘सिचुएशन्स’ को ‘एक्सप्लोर’ करते हुए, कोई हमारे समय के ‘मेट्रोपोलिटियन यूथ’ की ‘साइ(...)'

पूरा लेख पढ़ा

बलराज साहनी पर विष्णु खरे

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 07-05-2013 03:01:00

'चवन्‍नी के पाठकों के लिए बुद्धू-बक्‍सा से साभार... [शायद मुट्ठी भर से भी कम लोगों को इसका भान होगा कि ठीक आज से बलराज साहनी की जन्मशती शुरू हो रही है. इस मौके पर विष्णु खरे ने एक बहुत संगठित और जानकारियों से भरा हुआ आलेख लिखा है, जो आज के 'नवभारत टाईम्स' में प्रकाशित है. हिन्दी सिनेमा के ठप्पों को बेहद लफ्फाज़ी और बेतुके तरीकों से याद करने का प्रचलन हिन्दी में चल पड़ा है, जिससे सिनेमा लेखन का जो नुकसान होना होता है वह हो ही रहा है, साथ ही साथ सिनेमा का भी हो रहा है. फ़िर भ(...)'

पूरा लेख पढ़ा

ब्लॉकबस्टर राइटर्स साजिद-फरहाद -रघुवेन्‍द्र सिंह

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 06-05-2013 09:35:00

'एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्में लिख रही सगे भाइयों साजिद-फरहाद की जोड़ी से रघुवेन्द्र सिंह ने की विशेष भेंट हिंदी सिनेमा में लंबे समय के बाद लेखक की किसी जोड़ी ने तहलका मचाया है. उनकी लिखित फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ बिजनेस न करें, ऐसा असंभव है. गोलमाल रिटन्र्स, ऑल द बेस्ट, गोलमाल 3, रेडी, सिंघम, बोल बच्चन की कामयाबी की दास्तान बच्चा-बच्चा जानता है. जनाब! अब आलम यह है कि साजिद-फरहाद की जोड़ी को ब्लॉकबस्टर जोड़ी कहकर संबोधित किया जा रहा है. मगर इस मुकाम तक पहुंचने का सफ(...)'

पूरा लेख पढ़ा

पब्लिक सब जानती है : जॉन अब्राहम

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 05-05-2013 02:57:00

'-अजय ब्रह्मात्‍मज खान त्रयी और कपूर हीरो सरीखा स्टार कद रखते हैं जॉन अब्राहम। वे मार्केटिंग के स्टूडेंट रहे हैं और उसका बखूबी इस्तेमाल अपनी फिल्मों में कर रहे हैं। बतौर एक्टर तो उन्होंने खुद को स्थापित किया ही है, फिल्ममेकर के तौर पर भी वे एक विश्वसनीय ब्रांड बन चुके हैं। -अजय ब्रह्मात्मजइस फिल्म को लेकर आप को नहीं लगता कि आप थोड़े ज्यादा प्रो-मार्केटिंग हो गए हैं?मैं यह बताना चाहता हूं कि पहले तो इन सारे प्रमोशन में मैं बिलीव नहीं करता। मैं इतना अग्रेसिव हूं या एक्साइटेड हूं, (...)'

पूरा लेख पढ़ा

One Century, A Million Milestones- Anna M.M. Vetticad

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 04-05-2013 09:07:00

' - Anna M.M. Vetticad(आप अन्‍ना के लेख यहां पढ़ सकते हैं। ) Byari: An Indian language that even most Indians have not heard of.Byari: The title of the Best Feature Film at this year’s National Awards.For a foreigner, there is no better showcase of Indian heterogeneity than Indian cinema. And to understand India’s wildly diverse cinema in the 100th year since the release of the country’s first feature film, Raja Harishchandra, there are few commentaries more educati(...)'

पूरा लेख पढ़ा

बॉलीवुड में हिंदी-मनोज रघुवंशी

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 04-05-2013 05:04:00

'आठवें विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन के अवसर पर मनोज रघुवंशी ने बॉलीवुड में हिंदी नाम की फिल्‍म बनाई थी। हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में हिंदी की स्थिति के सच का यह एक पहलू है। आप भी देखें और गौरवान्वित हों। वैसे हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में हिंदी की वास्‍तविक स्थिति कुछ और है। इतराने में क्‍या जाता है ?'

पूरा लेख पढ़ा

फिल्‍म समीक्षा : बॉम्‍बे टाकीज

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 03-05-2013 15:35:00

'- अजय ब्रह्मात्‍मज भारतीय सिनेमा की सदी के मौके पर मुंबई के चार फिल्मकार एकत्रित हुए हैं। सभी हमउम्र नहीं हैं, लेकिन उन्हें 21वीं सदी के हिंदी सिनेमा का प्रतिनिधि कहा जा सकता है। फिल्म की निर्माता और वायकॉम 18 भविष्य में ऐसी चार-चार लघु फिल्मों की सीरिज बना सकते हैं। जब साधारण और घटिया फिल्मों की फ्रेंचाइजी चल सकती है तो 'बॉम्बे टाकीज' की क्यों नहीं? बहरहाल, यह इरादा और कोशिश ही काबिल-ए-तारीफ है। सिनेमा हमारी जिंदगी को सिर्फ छूता ही नहीं है, वह हमारी जिंदगी का हिस्सा हो ज(...)'

पूरा लेख पढ़ा

फिल्‍म समीक्षा :शूटआउट एट वडाला

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 03-05-2013 13:02:00

'-अजय ब्रह्मात्‍मज निर्देशक संजय गुप्ता और उनके लेखक को यह तरकीब सूझी कि गोली से जख्मी और मृतप्राय हो चुके मन्या सुर्वे की जुबानी ही उसकी कहानी दिखानी चाहिए। मन्या सुर्वे नौवें दशक के आरंभ में मारा गया एक गैंगस्टर था। 'शूटआउट एट वडाला' के लेखक-निर्देशक ने इसी गैंगस्टर के बनने और मारे जाने की घटनाओं को जोड़ने की मसालेदार कोशिश की है। मन्या सुर्वे के अलावा बाकी सभी किरदारों के नाम बदल दिए गए है, लेकिन फिल्म के प्रचार के दौरान और उसके पहले यूनिट से निकली खबरों से सभी जानते हैं(...)'

पूरा लेख पढ़ा

प्राण चूंकि दोस्त था... -सआदत हसन मंटो

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 03-05-2013 04:59:00

'(सआदत हसन मंटो ने अपने समकालीन फिल्म कलाकारों पर बेबाक संस्मरण लिखे हैं। उनके संस्मरण मीना बाजार में संकलित है। मीना बाजार में उन्होंने नरगिस, नूरजहां, के .क़े., सितारा, पारो देवी, नीना, नसीम बानो और लतिका रानी के जीवन प्रसंगों को अपने संस्मरण में उकेरा है। उन्होंने के .के. के संस्मरण में प्राण का भी उल्लेख किया है। हम यहां प्राण से संबंधित अंश प्रकाशित कर रहे हैं।)     ...बंटवारे पर जब पंजाब के फसादात शुरू हुए तो कुलदीप कौर, जो लाहौर में थी और वहां फिल्मों में क(...)'

पूरा लेख पढ़ा

21वीं सदी का सिनेमा

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 02-05-2013 03:33:00

'; -अजय ब्रह्मात्मज            समय के साथ समाज बदलता है। समाज बदलने के साथ सभी कलारूपों के कथ्य और प्रस्तुति में अंतर आता है। हम सिनेमा की बात करें तो पिछले सौ सालों के इतिहास में सिनेमा में समाज के समान ही गुणात्मक बदलाव आया है। 1913 से 2013 तक के सफर में भारतीय सिनेमा खास कर हिंदी सिनेमा ने कई बदलावों को देखा। बदलाव की यह प्रक्रिया पारस्परिक है। आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बदलाव से समाज में परिवर्तन आता है। इस परिवर्तन से सि(...)'

पूरा लेख पढ़ा

हिंदी सिनेमा की वीडियो बुक

Author : chavanni chap      Blog : chavanni chap (चवन्नी चैप)      Date : 02-05-2013 03:21:00

'-अजय ब्रह्मात्मज    सौ साल के हुए भारतीय सिनेमा पर विभिन्न संस्थाएं कुछ न कुछ उपक्रम और आयोजन कर रही हैं। पत्र-पत्रिकाओं के पृष्ठों से लेकर सेमिनार के बहस-मुबाहिसों में हम किसी न किसी रूप में भारतीय सिनेमा की चर्चा सुन रहे हैं। हिंदी सिनेमा की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया जा रहा है। व्यक्ति, प्रवृत्ति, विधा और अन्य श्रेणियों एवं वर्गों में बांट कर उनका अध्ययन, विश्लेषण और दस्तावेजीकरण हो रहा है। हम भारतीय दस्तावेज और रिकॉर्ड संरक्षण के मामले में बहुत पिछड़े और लापरव(...)'

पूरा लेख पढ़ा


garland of Languages of India
an amalgamation of the diversified traditions
gracefully presented with novelty
http://www.haaram.com