फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 04-05-2013 09:02:00
'फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता
हुआ शहर यह वह शहर नहीं रहा अब जिस शहर में
'' मैं कई वर्षो पहले आया था ''अब तो यह शहर हर समय भागता
नजर आता है !कच्ची सड़के ,कच्चे मकानों और साधन के नाम पर पर साईकल पर चलने
वाले लोग
रहते है अब आलिशान घरों मेंऔर दौड़ते है तेजी से कारों में नए आसमान की तलाश में फ्लाईओवर के आर- पार मोटरसाइकल कारों पर तेजी से दौड़ता
हुआ शहर पहुच गया है नई सदी में मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में बहुत तेजी से बदल रहा है .............(...)'
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मैं अकेला चलता हूँ -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 18-04-2013 06:29:00
'मैं अकेला चलता हूँ चाहे कोई साथ चले
या न चले मैं अकेले ही खुश हूँ कोई साथ हो या न हो पर मेरी छायाहमेशा मेरे साथ होती है !जो हमेशा मेरे पीछे- २ अक्सर मेरा पीछा करती है घर हो या बाज़ार हमेशा मेरे साथ ही रहती है मेरी छाया से ही मुझे हौसला मिलता है !क्योंकि नाते रिश्तेदार तो समय के साथ ही चलते है पर धुप हो या छाव
छाया हमेशा साथ रहती है और मुझे अकेलेपन का अहसास नहीं होने देती इसलिए मैं अकेला ही चलता हूँ ...............!!!
चित्र - गूगल (...)'
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दुनिया की महफ़िलों से
Author
: संजय कुमार भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 15-04-2013 14:10:00
'दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रबक्या लुफ्त अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया है..........!!!'
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दिन में फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर
Author
: संजय कुमार भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 04-04-2013 02:21:00
'जब कोई इस दुनिया से चला जाता है वह दिन उस इलाके के लिए बहुत अजीब हो जाता है चारों दिशओं में जैसे एक ख़ामोशी सी छा जाती है दिन में फैली ख़ामोशी वहां के लोगो को सुन्न कर देती है क्योंकि कोई शक्श इस दुनिया से रुखसत हो चुका होता है ...........!!!!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर '
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फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर
Author
: संजय कुमार भास्कर
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: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 02-04-2013 12:03:00
'जब कोई इस दुनिया से चला जाता है वह दिन उस इलाके के लिए बहुत अजीब हो जाता है चारों दिशओं में जैसे एक ख़ामोशी सी छा जाती है दिन में फैली ख़ामोशी वहां के लोगो को सुन्न कर देती है क्योंकि कोई शक्श इस दुनिया से रुखसत हो चुका होता है ...........!!!!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर '
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फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर
Author
: संजय कुमार भास्कर
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: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 01-04-2013 02:50:00
'जब कोई इस दुनिया से चला जाता है वह दिन उस इलाके के लिए बहुत अजीब हो जाता है चारों दिशओं में जैसे एक ख़ामोशी सी छा जाती है दिन में फैली ख़ामोशी वहां के लोगो को सुन्न कर देती है क्योंकि कोई शक्श इस दुनिया से रुखसत हो चुका होता है ...........!!!!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर '
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फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर
Author
: संजय कुमार भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 31-03-2013 04:52:00
'जब कोई इस दुनिया से चला जाता है वह दिन उस इलाके के लिए बहुत अजीब हो जाता है चारों दिशओं में जैसे एक ख़ामोशी सी छा जाती है दिन में फैली ख़ामोशी वहां के लोगो को सुन्न कर देती है क्योंकि कोई शक्श इस दुनिया से रुखसत हो चुका होता है .........!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर '
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फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर
Author
: संजय कुमार भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 31-03-2013 03:56:00
'जब कोई इस दुनिया से चला जाता है वह दिन उस इलाके के लिए बहुत अजीब हो जाता है चारों दिशओं में जैसे एक ख़ामोशी सी छा जाती है दिन में फैली ख़ामोशी वहां के लोगो को सुन्न कर देती है क्योंकि कोई शक्श इस दुनिया से रुखसत हो चुका होता है .........!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर '
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अक्सर मैं -- संजय भास्कर
Author
: संजय कुमार भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 17-03-2013 10:57:00
'आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर
नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा
रहा हूँ पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी नई कविता के साथ
उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी.......!!
अक्सर मैं यह नहीं समझ पाता की लोग प्रायः गंदे व फटे हुए हुएकपड़ो में मासूम बचों कायही रूप क्यों
देखते हैकि वह भिखारी है वह उसके कपड़ो के पीछे की जर्जर व्यवस्था उसकी गरीबी ,लाचारी
समाज की प्रताडना को क्यों नहीं दे(...)'
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आने वाले दिनों में -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर अहर्निश
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 13-02-2013 06:49:00
'आने वाले दिनों में जब
हम सब
कविता लिखते पढ़ते बूढ़े
हो जायेंगे !
उस समय लिखने के लिए
शायद जरूरत न पड़े
पर पढने के लिए
एक मोटे चश्मे की
जरूरत पड़ेगी
जिसे आज के समय में हम
अपने दादा जी की आँखों पर
देखते है !
तब पढने के लिए
ये मोटा चश्मा ही होगा
अपना सहारा
आने वाले दिनों में
देखता हूँ यह स्वप्न
(...)'
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आकर्षण --
Author
: संजय भास्कर अहर्निश
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 03-02-2013 06:52:00
'कॉलेज को छोड़े करीब सात साल बीत गये !मगर आज उसे जब 7 साल बाद देखा तो देखता ही रह गया !वो आकर्षण जिसे देख मैं हमेशा उसकी और खिचा चला जाता था !आज वो पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था !की वो मुझे देखते ही पहचान लेगी !पर आज कई सालो बाद उसे देखना बेहद आत्मीय और आकर्षण लगा मेरी आत्मा के सबसे करीब ..............!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर '
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ऐसी खुशी नहीं चाहता -- -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 16-01-2013 03:49:00
'
ऐसी खुशी नहीं चाहता
जो किसी का दिल दुखाने से मिले,
हंसी ऐसी नहीं चाहता जो किसी को रुलाने से मिले
उस दौलत का क्या करना जो अपनों से कर दे दूर,
जो जाने-अंजाने पैदा कर देती दिल में गुरूर |
सर ढकने को छत हो
खाने को रोटी हो भूखे पेट कोई सोये ना ,
नहीं चाहिए वो राम जो इंसानों में फर्क करे
आपस में बैर व धरती को नरक करे
कब आएगा वो दिन
जब उंच- नीच ख़तम होगा मानव सभी की जात होगी,
मानवता ही धरम होगा रोते हुये को हँस(...)'
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सारी घड़ियाँ बीत गई -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 01-01-2013 08:13:00
'सारी घड़ियाँ बीत गई अब हर रोज होगी मुलाकातें कुछ तुम कहना कुछ हम कहेंगेअपने दिल की बातें कैसे कैसे सपने देखेकैसे बीती रातें बीता वर्ष 2012 चला गया नया दिन 2013 के साथइंतज़ार की घड़िया ख़त्महो गई रूबरू हुये हम 2013 में
आपके साथ लेकर खुशियों की बरसात .........!!!
Happy New Year 2013चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर'
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मेरे पिता ही मेरी माँ -- 2- दिसम्बर जन्मदिन पर विशेष
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 02-12-2012 03:35:00
' 2 - दिसम्बर आज मेरे पापा का जन्मदिन है सबसे पहले पापा जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें.
पापा जी को एक छोटी सी भेंट कविता के रूप में .....................!!
***************************************
आप मेरे जीवन में
अदृश्य रूप से शामिल अपना अस्तित्व बोध करवाते बेशक माँ नहींमगर माँ से कम भी नहींमाँ को तो मैंनेअपनी साँसों के साथ जान लिया मगर आपको आप जिसके कारणमेरा वजूद
अस्तित्व पायाआपको , आपके (...)'
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दुआ फलती नहीं तो क्या हुआ-- राजेश कुमारी ( ह्रदय के उदगार )
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 21-11-2012 10:14:00
'उसकी दुआ तुझ पे फलती नहीं तो क्या हुआ
वक्त के साथ घडी चलती नहीं तो क्या हुआ !!
बाजुओ में तेरे ताकत आज भी है बहुत
रहम की भीख तुझे नहीं मिलती तो क्या हुआ !!
पेट की आग तो वो भी बुझा लेते है
अब चूल्हे में लकड़ी जलती नहीं तो क्या हुआ !!
कूद जाते है फल खुद ही दरख्त से
डाली अब नरमी से झुकती नहीं तो क्या हुआ !!
तर जाते है सागर भी हिम्मत वाले
पहुचने की कश्ती नहीं मिलती तो क्या हुआ !!
उस रब की इबादत पे भरोसा रख तू
अब के किस्मत तेरी चमकी नहीं तो क्या हुआ !!
****(...)'
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........कहीं तुम वो तो नहीं -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 03-11-2012 03:08:00
' सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ !
.........मेरी कविता .....कुछ खो जाना के लिए प्रतुल वशिष्ठ ने कुछ लाइन लिखी है उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी...........!!
@ रोज़ सुबह उठते हुए
अकसर कुछ खो जाता है ...
कभी अधूरे सपने तो कभी उनका मज़मून.
'क्या देखा था.. कौन-कौन मिले थे' ....प्रश्न थोड़ी-थोड़ी देर में कौंधते हैं.
वैसे ही(...)'
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एक चिथड़ा सुख लिए भटकता हिन्दुस्तान -- प्रेम लोधी
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 14-10-2012 10:45:00
'इतिहास की अंधी गुफाओं से गुजरते हुए
आर्यो , मुगलों , अंग्रेजों...
और तथाकथित अपनों की
नीचताओं को देखते-देखते
अपनी ऑंखों में हो चुके मोतियाबिन्द को
अपने भोथरे नाखूनों से
खरोंचने की कोशिश में
ऑंखों की रोशनी खो बैठा
वह आदमी
राजमार्गों से बेदखल होकर
पगडंडियों को अपनी घुच्ची निगाहों से
रौंदते हुए घिसट रहा है!
उसकी फटी जेब में
जो एक टुकड़ा सुख चमक रहा है
वह उसका संविधान है
इसे वह जिसको भी दिखाता है
वही अपने को ,
इससे उपर बताता है ।
गोधूलि की बिखरी हुई लालिम(...)'
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आज की ताजा खबर -- अंजु (अनु) चौधरी ( क्षितिजा )
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 08-10-2012 03:08:00
'आज की ताजा खबर
*********************
टीवी का शोर
दिमाग है गोल
लिखने का है मन
पर सूझता नहीं कुछ
कैसे कुछ सोचू
कैसे कुछ नया लिखू
यह तो बस नई पुरानी फिल्मो का संग
अमिताभ के गाने
संजय दत की ढिशुम- ढिशुम
गोविंदा के झटके
अब क्या करूं
न्यूज़ चैनल पर रुकता रिमोट
फिर धमाको से गूंजा मुंबई
फिर हुए ब्लास्ट
देखा लाशो के ढेर&n(...)'
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.......... नकाब -- संजय भास्कर
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 25-09-2012 03:34:00
'आज हर चेहरा सच्चा नहीं
हर चेहरे पर नकाब है
सच्चाई को ढकता हुआ नकाब
कभी इन चेहरे को ढके हुए
नकाब हटा कर तो देखो
देखते ही रह जाओगे
फिर सोचोगे, जो देखा था , वो धोखा था
हर किसी का चेहरा होगा अनजान
जो देखा, जो सोचा, सब झूठ था !
अपनी बातो से दूसरो को भी
झूठा बनाया !
पर कब तक छुपायेगा
एक दिन तो सच सामने आयेगा
और उस दिन वह नकाब हटाएगा.......!!(...)'
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आखिर बुरा क्या है -- संगीता स्वरुप 'गीत' ( उजला आसमाँ )
Author
: संजय भास्कर
Blog
: आदत.. मुस्कुराने की
Date
: 13-09-2012 03:14:00
'आखिर बुरा क्या है ?
***********************************
मन के दरख्त पर
जमा ली
ख्वाहिशो ने अपनी जड़े
और फलती फूलती जा रही है
अमर बेल की तरह उतरोतर.
रसविहीन दरख्त मौन है
बना हुआ पंगु सा
जब होगा एहसास हकीकत का
तो हो जाएगी सारी बेलें
धूल धूसरित.
मन ने सोचा कि
पलने दो अंत में दो
मिटटी ही नसीब है
कुछ पल खुश होने दो
आखिर बुरा क्या ?
*******************************************************(...)'
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