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पड़ोसियों के राज़

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 21-05-2013 09:57:00

'कहानियों में सुना करते हैं की सबसे सुखी इंसान वो है जिसे अच्छा पडोसी मिल जाए और वैसे ही कहा जाता है की किस्मत वाला वो है जिसे ज़िन्दगी में केवल एक सच्चा दोस्त मिल जाए | कहानियों में इसलिए कहा की आज जिस समाज में हम रह रहे हैं यहाँ हम दूसरों के दुःख दर्द बांटने को बेवकूफी समझा करते हैं और पडोसी या दोस्त हमारे जीवन का हिस्सा बने इसे हम अपनी व्यक्तिगतता में दखल अंदाजी मानते हैं | हकीकत में हम समाज अब एकांतवासी होते जा रहे हैं और आवश्यकता होने पे ही किसी दुसरे व्यक्ति से मिलने य(...)'

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सिविल डिसओबिडियेन्स

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 19-05-2013 03:22:00

'सत्याग्रह या सदाग्रह का शाब्दिक अर्थ सत्य के लिये आग्रह करना होता है.यह और बात है की असत्य की राह पे चलने वालों को यह शब्द सिविल डिसओबिडियेन्स या कह लें सविनय अवज्ञा लगता है. सत्याग्रह का सही तरीका यह है की अन्याय का सर्वथा विरोध करते हुए अन्यायी के प्रति वैरभाव न रखना | समाज मैं असत्य या बुराई से लड़ने के कई तरीके इंसानों ने अपनी समझ और ज़रुरत के अनुसार समय समय पे अपनाये |किसी ने कहा बुरे इंसान के साथ उससे भी अधिक बुरा करो, किसी ने कहा इन्सा(...)'

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सत्यमेव जयते

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 18-05-2013 09:07:00

'आज के इस युग में ऐसा नहीं कि अच्छे लोग नहीं लेकिन यह भी सत्य है कि अच्छाई और अच्छे लोगों को साथी कम ही मिला करते हैं | चलिए आज यह भी जाने की इसका क्या कारण है ? मुझे तो एक ही कारण नज़र आता है कि सत्य कि राह में तकलीफ ,परेशानियां और अकेलापन है और असत्य, भ्रष्टाचार कि राह में आराम , शोहरत ,धन दौलत और साथियों का हुजूम है |यह और बात है की सत्य की राह में इज्ज़त है और असत्य की राह में ज़िल्लत लेकिन आज के युग में इज्ज़त की अहमियत कम होती जा रही है | मैं हमेशा कहा करता हूँ(...)'

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कहाँ गया गाँधी का हिन्दुस्तान ?

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 11-05-2013 17:36:00

'हिन्दुस्तान को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद करवाने में राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की दी गयी कुर्बानियों को देश आज भी याद करता है लेकिन जब आज के हिन्दुस्तान पे नज़र डालते हैं तो महात्मा गाँधी का सपना सच होते नहीं दिखाई देता यहाँ तक की कोशिश भी नहीं दिखती | महात्मा गाँधी के विचारों को पढ़ते समय कुछ पंक्तियाँ ऐसी पढ़ी की लगा यदि आज यह हिन्दुस्तान गाँधी के सपने जैसा हिन्दुस्तान होता तो कितना सुखी होता | देखिये गाँधी जी पश्चिमी सभ्यता के अनुसरण के बारे में क्या कहते हैं | मैं तो(...)'

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इस्लाम के खिलाफ नहीं है वंदे मातरम् शफीकुर्रहमान बर्क साहब

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 09-05-2013 19:10:00

'बुधवार को लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से पहले सदन में 'वंदे मातरम्' की धुन बजने के दौरान संभल से बीएसपी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क उठकर बहार चले गए और तर्क यह दिया की इस्लाम के खिलाफ है वंदे मातरम् | कहते हैं अज्ञानी हमेशा विवाद खड़ा कर देता है वही हाल बर्क साहब ने किया है | इन्होने ना वंदे मातरम् को समझा , न देश प्रेम को और न इस्लाम को और कर गए ऐसा काम कि लोगों को मौक़ा मिला कहने का इस्लाम को मानने वाला एक सांसद अपने ही देश गान  की इज्ज़त नहीं करता | सा(...)'

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Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 08-05-2013 05:25:00

'इंसान को जीवन में यदि कुछ पाना है तो उसके लिए मेहनत अवश्य करनी होती है लेकिन इन्सान की इच्छा हमेशा यही रही है की उसे कम या बिना मेहनत के सबकुछ मिल जाए |अपनी कम मेहनत और अधिक लाभ की इच्छा को पूरी करने के लिए इन्सान शार्टकट के रास्ते तलाश करने लगता है | कभी छात्र और छात्राएं परीक्षा में नक़ल के रास्ते तलाशने लगते हैं और कभी अपना काम आसानी से करवाने के लिए लोग दफ्तरों में तो रिश्वत खोरों की तलाश करने लगते हैं | कभी हम लाटरी ,इनाम जैसे ईमेल और एस एम् एस के शिकार हो ज(...)'

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इज़्ज़त व प्रतिष्ठा गुलामी से बचाती है

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 07-05-2013 04:53:00

'नहजुल बलागा में हज़रात अली (अ.स) के कथन और पत्रों का एक संकलन है जिसे हर इन्सान को एक बार अवश्य पढना चाहिए |अपने एक ख़त में अमीरुल मोमिनीन (अ) जवानों को वसीयत वसीयत करते हैं सभी को अपनी इज्ज़त की फ़िक्र पहले करनी चाहिए और इसकी हिफाज़त तेरे ही हाथ मैं है | अपनी इज्ज़त का सौदा इस संसार में किसी भी मक़सद तक पहुँचने के लिए करना नुकसान का सौदा है | अगर तूने इस राह में अपनी इज़्ज़त व प्रतिष्ठा खो दी तो तो तू लोगों का गुलाम बन के रह जाएगा |इज़्ज़ते नफ़्स(Self Respect) इंसान की बुनिया(...)'

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सामाजिक भय का ह्रास और दुराचार

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 01-05-2013 03:06:00

'हमारे समाज में अमर्यादित आचरण जैसे महिलाओं से छेड़छाड़ व बलात्कार का बढ़ना और हद अब यह कि अपने ही घर में बेटियों का सुरछित रहना मुश्किल होता जा रहा है| इसके बहुत से कारन हैं जिनके ऊपर विचार विमर्श होता रहता है और रोजाना नए नए सख्त कानून भी बनते जा रहे हैं लेकिन फिर भी यह बलात्कार रुकने की जगह ऐसा लगता है की बढ़ता ही जा रहा है | इंसान एक सामाजिक प्राणी है और वो जिस समाज में रहता है वहाँ के कानून और उसके धर्म के कानून उसे अमर्यादित आचरण से रोकते हैं | धर्म ने(...)'

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शिशु का मस्तिष्क और पहले दो वर्ष

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 30-04-2013 10:07:00

'आप का शिशु जब जन्म लेता है तो उसका मस्तिष्क सीखने के लिए तैयार होता है। जब वो आंखें खोलता है, उसकी बुद्धि अपने चारों ओर की चीज़ों को समझने के लिए तैयार हो जाती है। शिशु का मस्तिष्क हर समय से अधिक पहले दो वर्षों में विकास करता है इसी समय आप के शिशु को आप की सहायता की आवश्यकता अधिक होती है। ऐसे मैं अपने बच्चे से बातें अधिक कीजिए और उसके साथ सम्पर्क स्थापित कीजिए। बच्चे की स्मरण शक्ति में वृद्धि करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीज़ आंखों का सम्पर्क तथा उससे बात करना है। उससे थोड(...)'

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आज किस विषय पे लिखूं ?

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 27-04-2013 07:26:00

'कल एक साहब से मुलाक़ात हो गयी | एक साल पहले जनाब नए नए लेखक बने थे और सच यह है की लिखते भी बहुत बढ़िया थे | अब जो मुलाक़ात हुई तो उनसे पुछा भाई कुछ नया लिखा क्या ? कहने लगे लिखने का तो शौक है और लिखता भी हूँ लेकिन लिख के बक्से में बंद कर देता हूँ कहीं प्रकाशित नहीं करता | मैंने आश्चर्य से पुछा ऐसा क्यूँ ? कहने लगे ज़माना बड़ा खराब है लोग पैसे ले कर भ्रष्ट लोगों की तारीफ में लिखते हैं और इमानदारों का पोस्टमार्टम कर के उनकी छवि खराब करने की कोशिश करते हैं और मैं ठहरा(...)'

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सेक्चुअल डिज़ायर्स और परिवार

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 24-04-2013 08:49:00

'परिवार और संस्कार  इंसान का जिस्म अलग-अलग अंगो से मिलकर बना है और उन अंगो के बीच एक क़ुदरती ताल्लुक़ हुआ करता है इन अंगो का स्वस्थ रहना आवश्यक हुआ करता है वरना शरीर धीरे धीरे ख़त्म होने लगता है | उसी तरह समाज भी छोटे बड़े परिवारों से मिल कर बनता है। इन परिवारों में संस्कार , समाज धर्म और देश के कानून की इज्ज़त का होना आवश्यक हुआ करता है | ऐसा न होने से परिवार बिखरने  और समाज भ्रष्ट होने लगता है| इंसान कुदरती तौर से ज़िन्दा रहना चाहता है और केवल जिंदा ही नही(...)'

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बलात्कार और दरिंदगी

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 21-04-2013 16:19:00

'महिलाओं के साथ बलात्कार का इतिहास बड़ा पुराना है और समाज के सख्त कानून द्वारा इस्पे रोक लगाने की कोशिश हमेशा से होती रही हैं | कभी किसी देश ,समाज या धर्म के कानून इस गुनाह को कम करने में कामयाब हो जाते हैं और कभी अचानक ऐसी शर्मनाक घटनाओं में बढ़ोतरी होने की खबरें आने लगती हैं | और धर्म में भी बलात्कार को शर्मनाक बयाता गया है लेकिन इस्लाम में तो इसकी सजा मौत तक है यदि यह अपराध किसी शादीशुदा ने किया हो और शराब तो मुकम्मल तौर पे हराम है |हाँ आज कल पश्चिमी सभ्यता का य(...)'

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यह तो दुनिया की पुरानी आदत है |

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 20-04-2013 18:04:00

'मैं अंग्रेजी और हिंदी के कुल मिला के ८  ब्लॉग को अपना समय देता हूँ | कुछ ब्लॉग अंग्रेजी के हैं कुछ हिंदी जिनमे से कुछ धार्मिक और कुछ सामाजिक सरोकारों से जुड़े जैसे अमन का पैगाम | पिछले ७-८ महीने बीमारी के कारण ब्लॉगजगत से दूर रहा और जब वापस आया तो लगा यहाँ भी बहुत कुछ बदल गया है | अफवाहों का बाज़ार गर्म है लोग अब facebook और अन्य जगहों पे अधिक समय दे रहे हैं | ज़मीनी स्तर पे भी कुछ लोग काम करने लगे हैं जिनमे अधिकतर तो धन कमाने के आसान  रास्तों की तलाश कर रहे हैं | (...)'

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अंतरराष्ट्रीय समलैंगिक परेड काठमांडू में

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 20-04-2013 03:14:00

'यूपी में रोज़गार के अवसर कम हैं इसी कारण लोग अक्सर मुंबई इत्यादि शहरों की ओर भागते हैं | कई बार ऐसी खबरें भी आ जाती हैं की नौकरी देने की लालच दे के किसी महिला का शारीरिक शोषण किया गया | कल हमारे एक मित्र ने बताया की जनाब ऐसा नहीं की केवल महिलाओं का शारीरिक शोषण किया जाता हो ,यूपी के कई छुटभैये नेता लड़कों को नौकरी का लालच देके उनके साथ सम्लैंगिन सम्बन्ध बनाने का ऑफर भी देते पाए गए हैं | यह बात सुनते ही एक पुरानी खबर याद आ गयी “अंतरराष्ट्रीय समलैंगिक परेड (...)'

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इस्तीफा देने का यह मीठा अंदाज़|

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 19-04-2013 16:16:00

'क्रिस होम्स जो ब्रिटेन के स्टैंस्ड एयरपोर्ट पर काम करते थे अपने इस्तीफे को अजब मीठे अंदाज़ में पेश लिया | उन्होंने ३१ साल की उम्र में पिता बनने के साथ ही अपना यह इस्तीफा अपने वरिष्ट अधिकारीयों को केक पे लिख के भेजा जिसमे उन्होंने लिखा कि अब वो अपने परिवार और कारोबार को अपना समय व ऊर्जा समर्पित करना चाहते हैं| उनके इस्तीफे का यह अंदाज़ उनके वरिष्ट अधिकारीयों को भी बहुत पसंद आया और उन्हें तुरंत शुभकामनाओं सहित उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया| उनके इस इस्(...)'

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पोर्न वेबसाईट का ज़हर और हमारा समाज

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 19-04-2013 02:35:00

'पोर्न वेबसाईट का ज़हर अब हमारे समाज के युवाओं को अब खोखला करता जा रहा है | इंदौर के एक अधिवक्ता कमलेश वासवानी ने कोर्ट में दी गयी अपनी अर्जी में कहा की औरतों के खिलाफ जो भी अपराध हो रहे हैं उनकी बहुत हद तक ज़िम्मेदार इन्टरनेट पे आसानी के साथ मौजूद पोर्न साईट हैं |आज इन्टरनेट पे एक आंकड़े के अनुसार २० करोड़ से अधिक पोर्न विडियो इन्टरनेट में पड़े हुए हैं जिन्हें कोई भी डाउनलोड कर के देख सकता है | इन पोर्न विडियो में औरतों के साथ क्रूर, हिंसक व्यवहार , बलात्कार ,कौटुम्बिक व्य(...)'

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भारत के शहीदों का सपना क्या यही था?

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 16-04-2013 14:48:00

'आज के भारत को देख के वो सभी शहीद जिन्होंने अपने देश को गुलामी से आज़ाद करवाने के लिए कुर्बानियां दे दी क्या सोंचते होंगे ? यह तो तय है की खुश नहीं होते होंगे क्योंकि आज का जो भारत है वो उनका सपना नहीं था | शायद आज़ादी का नाजायज़ फायदा हम भारतवासियों ने लिया और आज भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा पे पहुँच गया | घबराएं  नहीं कोई भाषण नहीं देना है और न ही कोई राजनीतिहै | बस आज अचानक लता मंगेशकर का गाना “ऐ मेरे वतन के लोगों “ कानो में पड़ा और आँख से आंसू शहीदों की क़ुरबानी याद कर के(...)'

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ब्लॉगजगत में टोपी पहनाओ टीका लगवाओ प्रतियोगिता |

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 15-04-2013 18:18:00

'जी हाँ कुछ दिनों से ब्लॉगजगत की उडती उडती ख़बरों में सुनाई देने लगा है कि अब हिंदी ब्लॉगजगत में भी टोपी पहनाओ और टीका लगवाओ प्रतियोगिताएँ होने लगी हैं | प्रतियोगिताएँ शब्द का इस्तेमाल इस लिए किया की ऐसे बहुत से नेक नाम जो अब हो रहे हैं बदनाम, सामने आने लगे हैं | मैं तो इन चक्करों में पड़ता नहीं बस दूर से ब्लॉगजगत का यह हाल देख दुखी अवश्य होता हूँ | अंग्रेजी से हिंदी ब्लॉगजगत में जब क़दम रखा था तो ऐसा लगा था की एक से एक बढ़ के लेखन होंगे ,कवी होंगे ,उनको पढ़ा ज(...)'

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कट्टरवादी व्यक्ति ही सहिष्णु हो सकता है

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 14-04-2013 07:48:00

'कभी कभी कुछ शब्दों का इस्तेमाल बार बार गलत सन्दर्भ में होने के कारण उसका अर्थ ही बदल जाता है |जिस प्रकार से फतवा और जिहाद का गलत इस्तेमाल हुआ है उसी प्रकार से कट्टरवाद का इस्तेमाल भी गलत ही होता है | फतवा शब्द सुनते ही ऐसा लगता है की किसी मुल्ला ने अपने मुसलमान पे किसी हुक्म को मानने के लिए ज़बरदस्ती की होगा | जबकि इस्लाम का कानून है दीन में में कोई ज़बर्दस्ती नहीं है| आप किसी को यह तो बता सकते हैं की इस्लाम की नज़र में किसी काम के(...)'

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बॉब २०१३ का चुनाव बेहतरीन चुनाव है

Author : S.M Masum      Blog : अमन का पैग़ाम      Date : 13-04-2013 03:42:00

'जब से बॉब २०१३  की वोटिंग शुरू हुई है ब्लॉगजगत के एक ऐसे गुट में हलचल सी शुरू हो गयी है जो खुद को इस ब्लॉगजगत का खम्बा समझता था । इस चुनाव ने उनको ऐसा आईना दिखाया की उन्हें यही समझ नहीं आ रहा की हँसे या रोएँ । यह वही लोग हैं जिन्होंने खुद को बड़ा ब्लॉगर और ब्लॉगजगत का जानकार साबित करने के लिए पिछले २ सालों  में न जाने पब्लिसिटी के कितने हथकंडे अपनाये लेकिन ज्ञान की कमी और लेखनी में दम न होने के कारण उनका नाम केवल उनके मित्रों तक ही सीमित रह गया ।&nbs(...)'

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चिट्ठाकार

पिछले 24 घंटे में सक्रिय चिट्ठाकार. कोष्ठक में दिखाई गई संख्या पिछले 24 घंटे में प्रकाशित कड़ियों को व्यक्त करती हैं.



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