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Swatantrata

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 23-05-2013 11:34:09

'गुलामी की जब गुत्थी सुलझी,संविधान बने एक देश बना,गुरुदेव के राष्ट्रगान में बहकर,हर प्रान्त जुड़ा एक भेष बना,नील थी मिट्टी सोना उगली,हल-बैल चले कृषि-देश बना,नीव हुई विज्ञान की उजली,दिशाओं का नया शेष बना,जालियावाला बाग़ सजा फिर,बंद होंठों पर मुस्कान खिली,शहीदों … Continue reading →'

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Durbhagya Nahi He Maanav

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 13-05-2013 00:41:59

'दुर्भाग्य नहीं हे मानव,  तेरा अंत अमर हैं, इस पार मधु और प्रिये,  उस पार समर हैं !!   मिट्टी को तू नहीं जाना,  नहीं अम्बर के पीर को, तू स्वार्थ में ऐसा डूबा, नहीं जाना फ़कीर को, सागर का नीर … Continue reading →'

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Is Paar Us Paar

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 12-05-2013 02:00:44

'इस पार – उस पार (हरिवंशराय बच्चन) इस पार, प्रिये, मधु है, तुम हो,उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ मेंकुछ ताप मिटाता जीवन का,लहरा-लहरा यह शाखाएँकुछ शोक भुला देतीं मन का,कल मुर्झानेवाली कलियाँहँसकर कहती हैं, मग्न … Continue reading →'

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Aarzoo Thi

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 09-05-2013 06:59:18

'आरज़ू थी, हसरत भी,पर आपको फुरसत नहीं थी,दिल मेरा क्यों न समझा,कि आपको मुहब्बत नहीं थी !! जुस्तजू थी, इनायत भी,पर आपको अकीदत नहीं थी,दिल मेरा क्यों न समझा,कि आपको मुहब्बत नहीं थी !! जिस राह का कोई छोर नहीं … Continue reading →'

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Ek Naya Inklab Chahiye

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 05-05-2013 11:33:34

'फिर से एक नया इन्कलाब चाहिए,अब दिल में दिया नहीं तूफ़ान चाहिए,शोले धधकेंगे इन्साफ के तरकश में,अब हर जुर्म के चेहरे बेनकाब चाहिए,आग लगे अमन के इन आशियानों में,हम में फर्क करते मज़हब के पैमानों में,काँटों के हर चमन का … Continue reading →'

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Yakeen Ka Silsila

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 05-05-2013 03:04:05

'यकीन का सिलसिला,  धुवाँ में जा मिला, किसे मिली ज़मीं,  किसे निशां मिला; किसी की ज़िन्दगी,  किसे नफा मिला, मेरे खुदा यहाँ,  किसे वफ़ा मिला; कि रब्त हैं दुश्मनी,  तो इश्क क्यों नहीं? हसरतों की लफ्ज़,  जुबान क्यों नहीं? किसी … Continue reading →'

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Kya Kahoon

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 21-04-2013 03:45:39

'किस हदफ़ निगाहें करूँ मैं, कहो किसे हाजत-रवा कहूँ, किस पत्थर को आदमी मैं, या तुम फिर बोलो खुदा कहूँ !!   किस भरम बेराहें बढूँ मैं, कहो किन राहों से दुवा करूँ, किसे रहनुमा, हमसफ़र मैं, या तुम फिर बोलो जुदा कहूँ !!   किस तरफ आदाबें पढूँ मैं, कहो किस दिल की जुबां कहूँ, किसे आईने की रौशनी मैं, या तुम फिर बोलो … Continue reading →'

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Ateet Ke Dwar Par

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 17-04-2013 00:35:50

'अतीत के द्वार पर: ‘जय हो’, खोलो अजिर-द्वारमेरे अतीत ओ अभिमानी!बाहर खड़ी लिये नीराजनकब से भावों की रानी! बहुत बार भग्नावशेष परअक्षत-फूल बिखेर चुकी;खँडहर में आरती जलाकररो–रो तुमको टेर चुकी। वर्तमान का आज निमंत्रण,देह धरो, आगे आओ;ग्रहण करो आकार देवता!यह … Continue reading →'

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Mitne Ka Adhikar

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 16-04-2013 01:08:59

'वे मुसकाते फूल नहीं -जिनको आता है मुरझानावे तारों के दीप नहीं -जिनको आता है बुझ जाना। वे नीलम के मेघ नहीं -जिनको है घुल जाने की चाहवह अनंत ऋतुराज नहीं -जिसने देखी जाने की राह वे सूने से नयन, … Continue reading →'

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Ye Lau Na Bujhao

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 31-03-2013 22:43:19

'ये लौ न बुझाओ इसे जलने दो, अभी वो दिया जलाना बाकी हैं, हम जिस देश-प्रेम पर गर्वित हो, अभी वो धुआँ उठाना बाकी हैं,जो भूख-प्यास से मूर्छित हैं,अभी उन्हें जगाना बाकी हैं,जो सत्य-कार्य से प्रेरित हैं,उनका पता लगाना बाकी हैं,बाकी हैं … Continue reading →'

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Mitti Ki Aanch Se

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 22-03-2013 13:31:26

'मिट्टी की आँच से, बादल पिघल गया, बारिस की धार को, समंदर निगल गया, एहतमाम अर्श का, तूफ़ान निकल गया, यूँ ही फिर एक दफा मुकद्दर फिसल गया, कि हर आदमी यहाँ, खालिक बना हुआ, एहतेशाम वक़्त का, मालिक बना … Continue reading →'

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Shant Na Honge

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 15-03-2013 03:44:50

'शांत न होंगे, ये पत्तें, ये शाखें, विटपों के मन में धीर नहीं हैं, पिछले बरस जो आंधी टली थी, अब उन आँखों में नीर नहीं हैं, जो मेघ बना, अश्कों से सींचा , ये दुनिया कहे वो वीर नहीं हैं, जो हार … Continue reading →'

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Mera Parichay

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 03-03-2013 16:05:02

'जल की तरह मैं शीतल नहीं, नहीं अग्नि की तरह तपता हूँ, जब तक स्वतंत्र मन-भाव बहे, तब तक जिंदा रह सकता हूँ, अमृत की तरह मैं शुद्ध नहीं, नहीं औषध हूँ ज़ख्म भरता हूँ, जो मन शब्दों की मधुशाला हैं, वहाँ शब्द तरंग में बहता हूँ, नाहर की … Continue reading →'

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Koi Khota Kuchh Nahi Hain

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 02-03-2013 11:33:45

'यहाँ कोई खोता कुछ नहीं हैं, यहाँ कोई पाता कुछ नहीं हैं, जो कुछ भी हैं वो सब यहीं हैं, यहाँ कुछ हैं तो कुछ नहीं हैं !!   जो रूठे बैठे हो तुम ज़िन्दगी से, दोनों आँखों को यूँ सच न मानो, कि दिल से … Continue reading →'

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Amar Jawan

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 12-01-2013 16:17:21

'तुम फिर एकाँकी लिख लेना, हमे सरहद पर सो जाने दो,तुम कथा-वृतांत कह लेना,पहले ये शीश कट जाने दो,एक सरहद पार ही शत्रु नहीं,हैं एक मेरे घर के अन्दर भी,एक खून का कतरा बाहर तो,हैं एक बहता मेरे अंतर भी,जो शीश … Continue reading →'

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Aur Kitne Baras

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 01-01-2013 01:06:17

'कितने जुर्मों के निशां फिर से मिटेंगे,कितने कातिल सूली पे फिर से चढ़ेंगे,कितने उजड़े घर कल फिर से बसेंगे,कितने कश्ती फिर साहिल पर मिलेंगे,मालुम नहीं ये बशरियत जलेगी कब तक,कहाँ-कहाँ से उठेगी दहशत की चिंगारी,कितने बरस हम यूँ ही लड़-लड़ … Continue reading →'

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Naari

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 29-12-2012 17:43:40

'कभी धुप बनी, तो कभी तू छाया, तू जग जननी,  जग काम न आया, बन न्याय की दुर्गा,  अब तज माया, निर्भय बन तू,  बन प्रबल काया, ये नर जो तेरे इर्द-गिर्द हैं, कैसे इनको दुष्कर्म हैं भाता, किस नर का दोष मैं मानु, जब … Continue reading →'

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Aaj Bichhde Hain

Author : Chandra Tewary      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 19-12-2012 02:45:08

'आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं, ज़िन्दगी इतनी मुख़्तसर भी नहीं !! ज़ख्म दीखते नहीं अभी लेकिन, ठन्डे होंगे तो दर्द निकलेगा, तैश उतरेगा वक़्त का जब भी, चेहरा अन्दर से ज़र्द निकलेगा !! कहने वालों का कुछ … Continue reading →'

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Tu Thahar Ja

Author : Abhi Bhi Zinda Hun      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 03-12-2012 01:56:59

'तू ठहर जा, ओ बादल, मेरी दुनिया तो खोने दे, तू ठहर जा, ओ बादल, अश्क मोती तो होने दे !! ये मायने तेरी ज़िन्दगी के, तू जा कही और तलाश ले, ये गम का समंदर तेरा हैं, तू जा … Continue reading →'

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Main Aur Meri Tanhayee

Author : Abhi Bhi Zinda Hun      Blog : ANTARNAD - अंतर्नाद      Date : 11-11-2012 02:56:56

'आवारा हैं गलियों में, मैं और मेरी तन्हाई, जाएँ तो कहाँ जाएँ, हर मोड़ पर रुसवाई, मैं और मेरी तन्हाई, मैं और मेरी तन्हाई !!   ये फूल से चेहरे हैं, हँसते हुए गुलदस्ते, कोई भी नहीं अपना, बेगाने हैं सब … Continue reading →'

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चिट्ठाकार

पिछले 24 घंटे में सक्रिय चिट्ठाकार. कोष्ठक में दिखाई गई संख्या पिछले 24 घंटे में प्रकाशित कड़ियों को व्यक्त करती हैं.



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