एक झटपट पोस्ट...फ्रॉम अमस्टरडम :)
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 09-05-2013 08:55:00
'एक झटपट पोस्ट डाल रही हूँ।
इस समय होलैंड के अमस्टरडम शहर में हूँ। यह कैनालों का शहर है। कल सारा दिन कनालों के चक्कर लागते रहे हम। खूबसूरत लोगों का बहुत ही खूबसूरत शहर है। कल पहले तो मौसम सुहाना था, बाद में मुम्बई की बरसात का क्या है एतबार वाला हाल हो गया। जम के बारिश होने लगी और हम बरसाती मेंढक बन गए थे।
लेकिन दिमाग हमारा है खुराफ़ाती, सोचते रहे क्या ख़ास बात है यहाँ, और हमको नज़र आ ही'
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क्यों झाँकना नज़र में ये, नक़ाब जैसा है...
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 07-05-2013 11:10:00
'फ़िलहाल ये मेरी आखरी पोस्ट है। लौट कर आऊँगी लेकिन कब आऊँगी मालूम नहीं। आज ही निकल रही हूँ होलैंड और उसके बाद भारत के लिए। शायद आ पाऊं ब्लॉग पर या शायद न भी आ पाऊं। जो भी है आप सभी को हैपी-हैपी ब्लॉग्गिंग। कोई टंकी-वंकी पर नहीं चढ़ रही हूँ, बस एक बार फिर बीजी होने वाली हूँ। तो मिलते हैं एक छोटे/लम्बे ब्रेक के बाद :):)
जब भी लौट कर आऊँगी यहीं आऊँगी :)
मिला जब वो प्यार से, तो गुलाब जैसा है'
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साईकिल की सवारी ..
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 05-05-2013 19:39:00
'सोचिये तो बात बहुत छोटी सी है..और अगर विचार करें तो बात बहुत बड़ी, कम से कम मानसिकता का वृहत आकलन तो करती ही है, ये छोटी सी घटना...
साल के, छः से सात महीने यहाँ, कनाडा में, बरफ और ठण्ड का ही जोर रहता है, जब गर्मी आती है, तो बस यूँ समझिये, पंख-पखेरू, जीव-जंतु, इंसान, सभी ज्यादा से ज्यादा वक्त, घर के बाहर ही बिताना चाहते है, हर तरफ ख़ूबसूरती का वो आलम होता है, बस लगता है, जैसे स्वर्ग ही,'
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तिनका ही था कमज़ोर सा, उसका मुक़द्दर, देखना....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 04-05-2013 23:34:00
'किस्मत की वीरानियों का, मेरा वो मंजर, देखना
हैराँ हूँ घर की दीवार के, उतरे हैं सब रंग, देखना
उड़ता रहा आँधियों में वो, जाने कितना दर-ब-दर
तिनका ही था कमज़ोर सा, उसका मुक़द्दर, देखना
पोशीदा है ज़मीन के, हर ज़र्रे पर दिलकश बहार
उतरो ज़रा आसमान से, आएगी नज़र वो, देखना
सोया किया क़रीब ही, फ़रिश्ता दश्त-ए-दिल का
ख़ुशबू सी उसकी बस गई, महका है शजर, देखना
इश्क़ के दावे उनके,'
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अच्छा हुआ नर्गिस मर गयी ...
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 03-05-2013 11:50:00
'प्रस्तुत है एक संस्मरण ...
उनके फिर से निक़ाह करने की खबर सुन कर मैं हैरान हो गयी थी। अभी महीने भर पहले ही तो उनकी बीवी का इंतकाल हुआ था। फिर भी, हमने सोचा चलो उम्र ज्यादा हो जाए, तो इंसान को साथी की और भी ज्यादा ज़रुरत होती है। अपने भविष्य के बारे में ही सोचा होगा शायद उन्होंने, फिर हमें क्या, उनका जीवन, जो मर्ज़ी हो सो करें। हम तो वैसे भी, किसी के फटे में पाँव नहीं डालते।
खैर, बात'
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कितनी सच्चाई उसके बयानों में थी....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 02-05-2013 21:56:00
'मैं भी कल रात उन दीवानों में थी
और मेरी नज़रें गुजरे ज़मानों में थी
ये दिल घबराया ऊँचे मकाँ में बड़ा
फिर सोयी मैं कच्चे मकानों में थी
यूँ हीं दिखती हूँ मैं भी शमा की तरहाँ
पर गिनती मेरी परवानों में थी
उसकी बातों पे मैंने यकीं कर लिया
कितनी सच्चाई उसके बयानों में थी
मेरे अपनों ने कब का किनारा किया
मुझसे ज़्यादा कशिश बेगानों में थी
क्या ढूँढे 'अदा' वो तो सब बिक गया
तेरे'
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मैं ज़िन्दगी जलाकर बार-बार, छोड़ जाऊँगी.....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 01-05-2013 02:42:00
'इक ज़ुनून,
कुछ यादें,
थोड़ा प्यार,
छोड़ जाऊँगी।
इन हवाओं में मैं
इंतज़ार,
छोड़ जाऊँगी।
ले जाऊँगी साथ,
कुछ महकते से रिश्ते,
मेरे नग़मों की बहार
छोड़ जाऊँगी।
कहीं तो होंगे,
मेरे भी कुछ ग़मगुसार,
जलाकर इक दीया
प्रेम का यहीं कहीं,
ये मज़ार,
छोड़ जाऊँगी।
कहाँ-कहाँ बुझाओगे,
मेरी सदाओं की मशाल,
मैं ज़िन्दगी जलाकर,
बार-बार,
छोड़ जाऊँगी।
मैं लफ्ज़-लफ्ज़ यक़ीं हूँ,'
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KENNY ROGER'S SONG...LUCILLE.....संतोष शैल की आवाज़ में...
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 30-04-2013 17:09:00
'Kenny Rogers — Lucille lyricsSongwriters: Bowling, Roger;Bynum, Hal
संतोष शैल की आवाज़ में...
In a bar in Toledo across from the depot
On a bar stool she took off her ring
I thought I'd get closer so I walked on over
I sat down and asked her name
When the drinks finally hit her
She said I'm no quitter
but I finally quit livin on dreams
I'm hungry for laughter and here ever after
I'm'
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एक कविता, एक ग़ज़ल, कुछ चित्र ....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 29-04-2013 23:52:00
'रुख को कभी फूल कहा आँखों को कवँल कह देते हैं
जब जब भी दीदार किया हम यूँ ही ग़ज़ल कह देते हैं
वो परवाना लगता है कभी और कभी दीवाना सा
जल कर जब भी ख़ाक हुआ शमा की चुहल कह देते हैं
वो आके खड़े हो जाते हैं जब सादगी लिए उन आँखों में
वो पाक़ मुजस्सिम लगते हैं हम ताजमहल कह देते हैं
लगता तो था कि आज कहीं हम शायद नहीं उठ पायेंगे
सीने में वो जो दर्द उठा चलो उसको अजल कह देते'
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निर्मल बाबा के बाद प्रकट हुई राधे माँ .....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 29-04-2013 11:14:00
'यह आलेख यहाँ से लिया गया है।
नई दिल्ली : कृपा के कारोबारी निर्मल बाबा के बाद एक और देवी का भारत भूमि पर अवतरण हो चुका है, इनको देवी दुर्गा का अवतार कहकर प्रचारित किया जा रहा है| इनका नाम है राधे माँ, ये कथित देवी दुर्गा की अवतार कही जाती हैं| दुल्हन जैसे भारी मेकअप और महंगे साड़ी-गहनों में नज़र आने वाली राधे मां के बार में पता चला है की अपने आशीर्वाद के बदले भक्तों से बड़ी कीमत वसूल'
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कोई आज बता ही देवे हमको ....कहाँ है हमरा घर ??????
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 28-04-2013 10:08:00
'लड़की !
यही तो नाम है हमरा....
पूरे १९ बरस तक माँ-पिता जी के साथ रहे...सबसे ज्यादा काम, सहायता, दुःख-सुख
में भागी हमहीं रहे, कोई भी झंझट पहिले हमसे टकराता था, फिर हमरे
माँ-बाउजी से...भाई लोग तो सब आराम फरमाते होते थे.....बाबू जी सुबह से
चीत्कार करते रहते थे, उठ जाओ, उठ जाओ...कहाँ उठता था कोई....लेकिन हम
बाबूजी के उठने से पहिले उठ जाते थे...आंगन बुहारना ..पानी भरना....माँ का
पूजा का'
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मेरी पसंद के नए गाने और एक विज्ञापन ....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 27-04-2013 20:03:00
'आज जाने क्यों दिल किया मैं अपनी पसँद के कुछ ओरिजिनल नए गाने डालूँ और एक फ़नी विज्ञापन भी। मुझे ये सारे गाने और यह विज्ञापन बहुत पसंद है। आपलोगों ने ये सुना/ देखा है ही, लेकिन बस आज मेरा दिल कर गया :):)
जो ख़्वाबों ख्यालों में सोचा नहीं था ....
दिल दे दिया है, जाँ तुम्हें देंगे ....
सुन ज़रा सोणिये सुन ज़रा ....'
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है निग़ाह मेरी झुकी-झुकी, ये ग़ुरूर मेरा हिज़ाब है....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 26-04-2013 16:18:00
'ये थका-थका सा जोश मेरा, ये ढला-ढला सा शबाब है
तेरे होश फिर भी उड़ गए, मेरा हुस्न क़ामयाब है
ये शहर, ये दश्त, ये ज़मीं तेरी, हवा सरीखी मैं बह चली
तू ग़ुरेज न कर मुझे छूने की, मेरा मन महकता गुलाब है
ये कूचे, दरीचे, ये आशियाँ, सब खुले हुए तेरे सामने
है निग़ाह मेरी झुकी-झुकी, ये ग़ुरूर मेरा हिज़ाब है
है बसा हुआ कोई शऊर है, मेरे ज़ह्न के किसी कोने में
है चमक गौहर की कोई, या नज़र'
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चाणक्य....
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 26-04-2013 00:23:00
'तक्षशिला (जो अब पकिस्तान में है) प्राचीन विश्वविद्यालय होने के लिए जग प्रसिद्ध था, यहाँ दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा लेने आया करते थे, इसी विश्वविद्यालय के महाज्ञानी और विद्वान् ब्राह्मण चाणक्य, व्यवहारिक राजनीति, दर्शन और हठवादी राजकौशल के सिद्धहस्त व्यवहारदर्शी थे, भारत के आरंभिक इतिहास में इनकी अपार प्रतिष्ठा थी, उन्हें 'विष्णुगुप्त' के नाम से भी जाना जाता था, जो उनके माता-पिता का'
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हमारी जिंदगी में भी, कई बे-नाम रिश्ते हैं......
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 24-04-2013 23:26:00
'हमारी जिंदगी में भी, कई बे-नाम रिश्ते हैं
उन्हें हम इतनी शिद्दत से न जाने क्यूँ निभाते हैं
तुम्हारी हर दगाबाज़ी हमें जी भर रुलाती है
सबेरा जब भी होता है तो हम सब भूल जाते हैं
यहाँ ये कैसी दुनिया है जिसे आभासी कहते हैं
अगर पत्थर वो झूठे हैं, क्यूँ सच्चे चोट खाते हैं ?
ज़रा रहती है मुझमें भी अभी इतनी सी ग़ैरत तो
कि जब नज़रें मिलाते हैं हम नज़रें चुराते हैं
अभी उतना'
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तुमको मालूम हो, ये दिल कभी बेचारा न था ...
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 24-04-2013 11:30:00
'जब तुम न थे साथ, तो कोई सहाऱा न था
पूरी दुनिया थी मगर, कोई हमारा न था
अब भी रात बाक़ी है, पर घूँघट उठाऊँ कैसे
हुस्न के ऐतमाद को, इश्क़ का किनारा न था
घोल के रंग-ओ-रोगन, मैंने बियाबाँ रंगीन किये
इससे बेहतर मेरे लिए, कोई नज़ारा न था
दिल के गोशे में एक आतिश, सी सुलगती है
गुनगुनाते हैं हम, हाँ हमने पुकारा न था
लुत्फ़ की बात हो, या क़हर की रात 'अदा '
तुमको मालूम हो, ये दिल कभी बेचारा न था
और'
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“Is India safe?” and “Is it OK for women to travel by themselves?”
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 23-04-2013 11:51:00
'By Margherita Stancati
Andrew Caballero-Reynolds/Agence France-Presse/Getty ImagesA tourist in a market in New Delhi, March 20, 2013.
The horrific gang rape and death of a young woman in Delhi in December has changed the perception many foreigners have of India.
Questions like: “Is India safe?” and “Is it OK for women to travel by themselves?” have become a lot more common among'
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क्या हम औरतें ऐसी ही होतीं हैं ???????(संस्मरण)
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 22-04-2013 11:55:00
'कल, एक बहुत ही खूबसूरत फिल्म आ रही थी टी वी पर, 'पिंजर' । यूँ तो कई बार देखा है इस फिल्म को, लेकिन हर बार यह फिल्म, मुझे बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देती है । नायिका पूरो की कहानी ...एक स्त्री की, स्त्रियोचित संवेदनाओं की उथल-पुथल का इन्द्रधनुषी शाहकार । रिश्तों, भावनाओं का निहायत खूबसूरती से संजोया हुआ, एक मार्मिक दस्तावेज़ है, ये फिल्म। पाप-पुण्य, इंसानियत- हैवानियत, आबरू-बेआबरू, असंतोष,'
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मेरी दोस्ती, मेरा प्यार ...
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 21-04-2013 10:39:00
'संताः यार सच्चे दोस्त कौन होते हैं
बंताः सच्चे दोस्त वो होते हैं जो मुश्किल वक्त में भी तुम्हारे साथ खड़े रहे
संताः अब ये कैसे पता चले की कौन साथ है
बंताः अपनी शादी की एलबम देख लो, जो उस सबसे मुश्किल वक्त में भी तुम्हारे साथ खड़े हैं वो ही तुम्हारे सच्चे दोस्त हैं।
ये तो हुआ एक लतीफ़ा। लेकिन सचमुच एक अच्छा और सच्चा दोस्त कौन होता है ? मैं अगर अपनी बात कहूँ तो मैंने ज़िन्दगी में और कुछ कमाया'
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एक पेड़ ऐसा भी ....(आँखों देखी )
Author
: स्वप्न मञ्जूषा
Blog
: काव्य मंजूषा
Date
: 20-04-2013 11:43:00
'इस समय जो भी सुनने को मिल रहा है ...मेरा यह संस्मरण सामयिक कहा जा सकता है, इसलिए दोबारा डाल रही हूँ।
ट्रेन से उतरना ऊ भी अकेले और ऊ भी सारे सामान के साथ कितना मुश्किल है, उतरते साथ हम अपनी आँखें मीच-मिचाने लगे ...दूर-दूर तक कोई भी पहचाना सा चेहरा नज़र नहीं आया....कोई आया क्यों नहीं लेने ? फ़ोन तो कर दिए थे कि २ बजे की ट्रेन से हम आ रहे हैं...थैला, बास्केट, पर्स सबकुछ उठाना कितना'
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