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लोग मल्टी क्लर्ड हो गए हैं --------ब्लॉग4वार्ता ----- ललित शर्मा

Author : ब्लॉ.ललित शर्मा      Blog :ब्लॉग 4 वार्ता      Date: 23-04-2012 23:16:00


ललित शर्मा का नमस्कार, आज अक्षय तृतीया है, महर्षि परशुराम की जयंती मनाई जा रही है धूम धाम से। इस अवसर पर सभी  मित्रों को शुभकामनाएं। आज से हम पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे हैं। इसलिए वार्ता पर उपलब्ध नहीं रहेगें। वार्ता की जिम्मेदारी बाकी साथियों पर है। अब हमारी वापसी 28 अप्रेल को होगी, तब तक के विदा लेते हैं। अब चलते हैं आज की वार्ता पर…… प्रस्तुत  है कुछ उम्दा  लिंक आपके पढने के  लिए……  कीजिए ब्लाग नगरिया की सैर………।

क्या तुम और क्या मैं !शानदार आलीशान फ़ुटपाथ पर रहने वाले दो बच्चे सोनू और मोनू की बातचीत... सोनू- और क्या भीड़ू ? मोनू- मस्त है...अपनी बताओ.. सोनू- अपुन बी मस्त! ...आज शाम का क्या प्रोग्राम है? मोनू- कुछ नई... वोSS..काका को छु...मैं एक प्रेमगीत लिखना चाहता हूँ मैं शांत और सरल दिखना चाहता हूँ; मैं एक प्रेम गीत लिखना चाहता हूँ, ऐसा भी नहीं कि [image: image] शब्द नहीं हैं मेरे पास शब्दकोष से मैंने चुन रखा है स्पर्श, आलिंगन और मनुहार जैसे शब्द, जो ...मक्खन इज़ बैक. हिंदी ब्लागिंग में इन दिनों मुझे खालीपन और भारीपन दोनों ही महसूस हो रहा है...खालीपन इसलिए कि मेरे पसंद के कुछ ब्लागरों ​ने लिखना बहुत कम कर दिया है...और भारीपन किसलिए...ये बताने की ज़रूरत ...

आशान्वित है धराजो हुआ अवतरित हरापन... कब क्यूँ कैसे? घोषित हो गया मरा! धुरी पे घूमते हुए विचारमग्न, कुछ कुछ चिंतित हो उठी धरा! हम पर ही आस लगाये हुए है, कातर नयनों से एकटक ताक रही है... वो सहनशील धरणी माँ है हमारी हमारे म...आज लोग मल्टी क्लर्ड हो गए हैं-श्रीगंगानगर- आईपीएसरूपीन्द्र सिंह कहते हैं कि श्रीगंगानगर की धरतीपर दो साल का कार्यकाल लक्कीपीरियड रहा। कारण नहीं पता। लोग मल्टी क्लर्ड होगए। पोलिटिकल व्यक्ति मुझ से नहीं सिस्टम से नाराज रहे। मुझे इस क्..सिद्धू -सन्धु जुगलबन्दीआज मैं प्रोफेसर दविंद्र कौर सिद्धू और अपने हाइकु को लेकर जुगलबंदी पेश कर रही हूँ । आशा करती हूँ ये प्रयास अच्छा लगेगा । * *खोज रे मन * *धरती से आकाश * *तेरा वजूद...............दविंद्र * *खोजा तो पाया* *धरा...

जब तेरे नैन मुस्कराते हैंखान  साहब मेहदी हसन की क्लैसिकल वाली सीरीज़ में चार-पांच प्रस्तुतियाँ अभी बची हुई हैं. आज पेश है अब्दुल हमीद अदम (1910-1981) की गज़ल. अदम साहब अपने ज़माने में खासे लोकप्रिय थे. उन पर एक विस्तृत पोस्ट किसी दि...
मुज़रिम मुक़र्रर है मुज़रिम ! अपरिहार्य है दंड , हो सके तो मौत ,यातना पूर्ण मौत ! अक्षम्य अपराध है उसका , धृष्ट ! रोटी माँगा ,कपड़ा माँगा , यहाँ तक की , मकान भी ! पक्षपात रहित न्याय ,शिक्षा , समानता ,अवसर , उठाने ल... किस किस को गरियायें  छत्तीसगढ़ में अफसरों का राज है, छत्तीसगढ़ में उद्योगपतियों का राज है, छत्तीसगढ़ में व्यापारियों  का राज है, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का राज है, छत्तीसगढ़ में माफियाओं का राज है और छत्तीसगढ़ में भाजपा का ...

जोशीमठ से औली पैदल यात्राइस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 4 अप्रैल 2012 की सुबह थी। आठ बजे मेरी आंख खुली। देखा कि विधान नहा भी लिया है। आराम से हम इसलिये सोकर उठे क्योंकि हमें आज मात्र औली तक ही जाना था ...
भागता बचपन भागता बचपन * ब्लॉगर साथियों नमस्कार । कुछ दिनों तक मै आपसब से दूर रही । बहुत जगह घूमना हुआ और इसके साथ मैंने आज की पीढ़ी के बच्चों का अध्ययन भी किया । जिस समस्या क... अंकों का इतिहास विश्व के विभिन्न स्थानों पर स्वतंत्र रुप से अलग-अलग तरह के गणना-चिन्हों (अंकों) व गणना पद्धतियों काविकास हुआ, जिसमें भारतीय, रोमन, मिश्री व क्रीट द्वीप के जनजातियों की गणना पद्धतियां विशेष रुप से उल्ले...

 बस्तर बोल रहा है  पिछले एक पोस्ट में मैंने बस्तर-माटी के अन्यतम हल्बी कवि श्री सोनसिंह पुजारी के विषय में संक्षेप में चर्चा की थी। इस पोस्ट में उनके विषय में विस्तार से चर्चा है और है उनकी कविता "पोरटा"। यह ध्वन्यांकन मैंन...  स्कॉटलैंड यात्रा - तीसरा और अंतिम भाग  आज के इस भाग में होगी हमारी वापसी अर्थात इनवरनेस(Inverness) से वापस एडिनबर्ग(Edinburgh) तक का सफर लेकिन एक अलग रास्ते और अलग मंज़िलों और नज़रों के साथ। अगले दिन इनवरनेस के...  हॉस्टल की कुछ शरारतें. आजकल जो कहानी लिख रही हूँ...उसका कथानक कुछ इतना गंभीर और दर्द भरा है कि पढ़ने वालों का मन भारी हो जा रहा है...फिर लिखनेवाले पर क्या गुजरती होगी...इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है. सोचा अपने कहानी लेखन को ...

हमेशा मेरी ही हो..! है न ?  नंगे पांव जब हरी हरी दूब में चलता हूं तुम्हारा कर्ज़दार सा तुम्हारे उपकार का आभार जता आता हूं पास वाले रास्ते के मंदिर में जो सुना है कल  टूट जाएगा अदालती फ़रमान की वज़ह से हर की पौड़ी पर गंगा मैया के भव्य दर्शनगौमुख से निकल गंगोत्री होती हुई भागीरथी नदी देवप्रयाग आकर बद्रीनाथ से आती हुई अलकनंदा से मिलकर गंगा बनती है । यहाँ से करीब ६० किलोमीटर हृषिकेश तक का पहाड़ी सफ़र गंगा की पवित्रता को बनाये रखता है। हालाँकि श...गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष  सभी लोगों को मालूम है कि अंधविश्‍वास का मूल कारण अज्ञानता है , जिन प्रश्‍नों का उत्‍तर विज्ञान नहीं ढूंढ पाया है , उसका जबाब ढूंढने की जनसामान्‍य की जिज्ञासा स्‍वाभाविक है और उसी का फायदा धर्म के नाम पर सम...

शहर में भीड़ तो होगीबाहर मौसम अच्छा है और समंदर से होकर नारियल के पेड़ों से उलझती हुई हमारी खिड़कियों तक पहुंच रही है। मैं बाहर जाने के लिए बेचैन हूं, बच्चों को घुमाने के लिए ले जाना तो एक बहाना है। "हम कहां जाएंगे?" आद्या ...ऐसे रचनाकार कईकहते हम सब भाई भाई, ऐसे रचनाकार कई आपस में छीटें रोशनाई, ऐसे रचनाकार कई समझाने के वो काबिल हैं, जिसने समझा रिश्तों को इनको अबतक समझ न आई, ऐसे रचनाकार कई बोझ ज्ञान का ढोना कैसा, फ़ेंक उसे उन्मुक्त रहो कहते, ...बन्द आँखों से…बन्द आँखों से हमने एक सपना बुना था. आँख खुली, तो रोशनी से आँखें चुधिया गयी.   ओस की बूँदें आज भी बिखर जाना चाहती है काटों के बीच वह सुर्ख लाल फूल आज भी मुस्कुरा देता है तेरे पास जाने को वे न जाने कैसे स...

माथा खाने से परहेज़ करें प्लीज़.प्रिय भक्तजनों ! मौसम में बहुत तेज़ी से बदलाव हुआ है . हाल तक शाल ओढनी पड़ती थी और अब बनियान भी उतार फेंकने को मन करता है . इतनी तीव्रता से गर्मी ने अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है . इसी गर्मी क...
ये बात जरा अंदर की है  ये कैसी टीम है भाई जो अपने कप्तान की ही ऐसी तैसी करती रहती है। अन्ना ने तो खुद बीते शुक्रवार यानि दो दिन पहले बाबा रामदेव से गुड़गांव में मुलाकात की और मुलाकात के बाद बकायदा प्रेस कान्फ्रेंस में ऐलान किया.. ब्लॉगर सबसे बड़ा मौन का साधक प्रारंभ से पढें सुबह जब सो कर उठे तो सुरज की किरणें कनात की झिरियों से आकर मुंह पर पड़ रही थी। रात नदी की रेत पर ही अच्छी नींद आयी। काफ़ी साथी लोग नहा धोकर तैयार हो गए थे। मौनी बाबा आदतन मौन थे, ये तो सिर...

फ़ेसबुकिया कबूतरी अहमदाबाद का सुबह का नजारा सुबह साढे 5 बजे आँख खुली तो खिड़की से अंधेरा नजर आ रहा था। तब समझ आया कि यहाँ हमारे छत्तीसगढ की अपेक्षा दिन देर से निकलता है। खिड़की से नीचे झांक कर देखा तो स्ट्री...नकटा मंदिर चाय आप अभी पीयेगें या स्नानाबाद? सुनकर आँख खुली तो बाबु साहब पूछ रहे थे। घड़ी साढे पांच बजा रही थी। मैने कहा - अभी ही, स्नान तो उसके बाद में ही होगा। बाबु साहब चाय बनाकर लाते हैं और अपनी स... मैं कोई किस्सा सुनाऊँगी कभी मैं कोई किस्सा सुनाऊँगी कभी आँखो से आँसू बहाऊँगी कभी तुम सुन सको तो सुन लेना स्याह रात की बिसरी बातें मैं तुम्हें बताऊँगी कभी मैं फासलों को मिटाऊँगी कभी मैं कोई किस्सा सुनाऊँगी कभी । खो गये हैं जो आ...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद्……… राम राम

चिट्ठाकार

पिछले 24 घंटे में सक्रिय चिट्ठाकार. कोष्ठक में दिखाई गई संख्या पिछले 24 घंटे में प्रकाशित कड़ियों को व्यक्त करती हैं.



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